Posts

कब

Image
कैद हैं कुछ  यादों के भंवर  जो सुलगते हैं  पर पिघलेगे कब ? - दीप्ति शर्मा 

भ्रष्टाचार आन्दोलन के "साइड इफेक्ट"

Image
  बहुत सारी भीड़ है | वो देश सुधार और भ्रष्टाचार को मिटाने का आन्दोलन कर रहे हैं ,  सारी सड़के जाम हैं , जनता बेहाल है , सरकार का बुरा हाल है , ये समाधान है या  कोई व्यवधान है जो  यहाँ हर कोई परेशान है   तभी एक एम्बुलेंस दूर से आती है , उस भीड़ में वो फंस  जाती है , मरीज की हालत गंभीर है पर कोई उसे निकलने नही दे रहा है क्यूँ की  वो समाज सेवी है और देश का सुधार कर रहें हैं | नारें लगा रहें वो देखो  लोगो का हुजूम बना  और समाज चला रहे हैं  वो जो तड़प रहा है अंदर  देख उसे नजरे झुका रहे हैं  न ही वो उनका सगा है  न ही सम्बन्धी है फिर  क्यों दिखावे में नहा रहें हैं  तड़प रहा है वो इलाज को  और देखो ये सब यहाँ  भ्रष्टाचार मिटा रहे हैं | बहुत सारी भीड़ इकट्ठी है , सरकार के खिलाफ कुछ हैं जो सच में साथ हैं और कुछ लोग दिमाग से वहा और मन से दफ्तर में हैं , जहाँ कोई आएगा घुस देके जायेगा , वो दलाल है सरकार के जिनके आँखों में हमेशा से ही पट्टी बंधी है | सरकार के खि...

तेरे लाज के घूँघट से

Image
                                             उमड़ आयी बदली  तेरे लाज के घूँघट से  द्वार पर  खड़ी तू  बेतस बाट जोहती  झलक गये तेरे केशू तेरे आँखों के अर्पण से | पनघट पे तेरा आना  भेष बदल गगरी छलकाना  छलक गयी गगरी तेरी  तेरे लाज के घूँघट से | सजीले पंख सजाना  प्रतिध्वनित  वेग से  झरकर गिर आयी  तेरे पाजेब की रुनझुन से | रागों को त्याग  निष्प्राण तन में उज्जवल  उस अनछुई छुअन में  बरस गयी बदली  तेरे लाज के घूँघट से  उमड़ आयी बदली  तेरे लाज के घूँघट से  - दीप्ति शर्मा                                                     

समझो गर तुम

Image
                                                शिकायत नहीं है वफ़ा से तुम्हारी  फिर भी तन्हाइयों के पास हूँ | उलझी हूँ अपनी ही कुछ बातों से  फिर भी तो जिन्दगी की मैं आस हूँ | क्यूँ ढूंढते हो मुझमें वो खुशियाँ  मैं तो अपने जीवन से निराश हूँ | कोई अनजाना डर तो है दिल में वजह से उसकी ही मैं उदास  हूँ | ज़िन्दगी जो अनजान है मुझसे  रंजों से ज़िन्दगी की मैं हताश हूँ | - दीप्ति शर्मा 

अस्तित्व की तलास

Image
                                               दुनिया में रह मुझे उन तमाम  हस्तियों को पहचानना ही पड़ा | हर नए सफ़र की मुश्किलों को उन उलझनों को अपना समझ  दिल से उन्हें मानना ही पड़ा | जहाँ में खोये हुए अपने वजूद को इत्मिनान से तलाशना ही पड़ा | अपने कुछ उसूलों की खातिर  उस अस्तित्व को खोजते हुए मुझे अपने आप को जानना ही पड़ा | - दीप्ति शर्मा 

दिल- ए- एहसास

Image
                                                         १.आपके चले आने से  दिल को करार आ जाये  जरा मुस्कुरा तो दीजिये  इस महफ़िल में भी  जान आ जाये|                                                                                                         २. कहो ना कुछ पर ये  निगाहें बोल जाती हैं  दिल की बातें निगाहों  से ही की जाती हैं|                                                     ३. आँखों में बसकर  दिल में उतर गये ...

अन्ना तेरी अगवानी में|

Image
                                          क्या करूँ मैं व्याख्यान  निरुत्तर हो गयी सरकार अब हो रहा समाधान  अन्ना तेरी अगवानी में| अंहि बन देश के गौरव का  अजब का उत्साह है  हम सब का साहस बढा अन्ना तेरी अगवानी में| अधिप बन शासन किया  फैलाया भ्रष्टाचार सरकार ने  पर अब हो रहा समाधान अन्ना तेरी अगवानी में| अंतस से उठी आवाज़  और है लोगो का साथ  अब हो रहा समाधान अन्ना तेरी अगवानी में| अदबी समाज साथ है कलम उनके हाथ है हौसला बढ रहा हमारा अन्ना तेरी अगवानी में| मुफ्तखोरी बन बहुत खाया  लोगो को खूब नचाया  अब हो जाएँ ये अंतरध्यान अन्ना  तेरी अगवानी में|   - दीप्ति शर्मा