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मैं चीख रही , मेरा लहू धधक रहा कहीं सड़क लाल तो कहीं बदरंग हो रही पर ना बिजली चमकी ना बरसात हुई ना आँधी आयी आयी तो उदासी बस नसीब में मेरे सुन ख़ुदा ! तू बहरा हो गया क्या ? -दीप्ति शर्...
नीले आसमां को देखती निगाहों की टकटकी, आँखों से रिसते पानी को सुबह की ओस से रात का तारा बना देती  है । @दीप्ति शर्मा
ये अमावस तारीखों में दर्ज हुयी बीत जाएगी, पर जो तुम मन में बसा लिए हो वो अमावस कभी क्या बीत पाएगी ? जवाब यही कि वक्त तो आने दो वक्त भी आया और गया पर अमावस ना खतम हुयी देखो मन तो तु...
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कुछ नोट्स

आज का दिन और गुन्नू सुबह सुबह मैं- गुन्नू गुड मॉर्निंग उठ जाओ गुन्नू- मम्मी सोई सोई प्लीज मैं - किसने बताया कि प्लीज भी बोलना है 'गुन्नू हँसते हुए दूसरी ओर मुँह कर लेट गया' थोड़ी ...

कुछ नोट्स

गुन्नू- मम्मी मम्मी मम्मी मैं - हाँ क्या हुआ? गुन्नू-  मम्मी आओ बैठें मैं- काम कौन करेगा फिर गुन्नू- हूट हूट मैं- अब ये क्या है गुन्नू- आऊल{ ऊल्लू हूट हूट बोलता है } फिर अचानक भागता ...
किसी की आत्मा के मर जाने से अच्छा उसका खुद मर जाना है क्योंकि इंसानियत रहेगी तभी इंसान भी बचा रहेगा। #दुनिया के फेर में फँसी दीप्ति