Monday 25 October 2010

दीवाना




दीवाना  जिसे हम कहते हैं 
दीवाना सही पर है वो क्या 
आखिर क्यूँ ये जमाना 
दिल वालो को 
दीवाना कहता है 
दीवाने की पहचान है क्या
हम किसे दिवाना कहते हैं 
दिवाना जिसे हम कहते हैं
 दिवाना सही पर है वो क्या 

वक़्त वो लम्हा है कौन सा 
जब ये दीवाने आते हैं 
दिखते कैसे  चलते कैसे 
इनकी कुछ पहचान तो दो 
कोई आके इस दिल को बताये 
की कैसे  ये दीवाने होते हैं
दीवाना  जिसे हम कहते हैं 

दीवाना सही पर है वो क्या 
ये मैने तब लिखा जब मैं ८ क्लास में थी तब मुझे कविता का मतलब भी ठीक से पता नही था
पर जो दिल ने कहा लिख दिया पर आज मैं आप सब को वो जरुर पढाना  चाहूंगी 


- दीप्ति 

Monday 18 October 2010

गम

जीना है सीखा इस गम से ,
पीना है सीखा इस गम से ,
हम हैं गम से 
गम हैं हम से |
ये जो जिंदगानी है हमसे ,
और मोहब्बत है तुमसे |
खुशिया हैं जो तुमसे 
वो डूब गयी मेरे गम से |
                                
- दीप्ति 

Sunday 17 October 2010

विजय पर्व


यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत याद दिलाता है|
आज के समय में कितने ही रावण यूँ ही घूमते हैं पर उनका नाश करने में हम भले ही असमर्थ हो पर हृदय में श्री राम को रख उनसे जूझने   का होसला तो ला ही सकते हैं |
और बुराई पर जय की विजय की कोशिश तो कर ही सकते हैं |
 जय राम जय राम जय जय राम 
श्री राम चन्द्र की जय  

विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाये 

Friday 8 October 2010

ऐसा एक संसार बनाऊं

ऐसा एक संसार बनाऊं ,
ना हो जहाँ गम का अँधियारा |

हर इंसा को मिले जहाँ ,
कश्ती का हर किनारा ,
महफ़िलें तो हो बहुत पर,
गम का ना नामों निशाँ हो ,
ऐसा एक संसार बनाऊं ,
ना हो जहाँ गम का अँधियारा |

मुश्किलें मिल जाये कहीं तो ,
आसाँ हो जाये ये रास्ता तुम्हारा ,
अरमाँ हो  पूरे दिल के सभी ,
और खिल जाये मुस्कान से ,
वो खुशनुमा चेहरा तुम्हारा|
ऐसा एक संसार बनाऊं ,
ना हो जहाँ गम का अँधियारा |
- दीप्ति 

Friday 1 October 2010

बताऊँ मैं कैसे तुझे ?

वो लम्हे हमें हैं अब याद आते ,
ना भूले हैं जानम ना भूल पाते ,
बताऊँ मैं कैसे तुझे ?
वो लहरों की कस्ती ,
वो फूलो की वादी ,
सितारों की झिलमिल ,
 कहाँ खो गयी ,
बताऊँ मैं कैसे तुझे ?

वो चूड़ी की छनछन ,
वो पायल की खनखन ,
कहाँ खो गयी ,
बताऊँ  मैं कैसे तुझे ?

वो कोयल की कूंह कूंह ,
 वो झरने का झरना ,
 रिमझिम सी बारिश,
 कहाँ खो गयी ,
बताऊँ मैं कैसे तुझे ?

 फूलों की ख़ुशबू ,
 महकता वो आँगन ,
 मोहब्बत वो मेरी ,
 कहाँ  खो गयी ,
 बताऊँ  मैं कैसे तुझे ?


- दीप्ति 

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